उत्पत्ति 1 (Genesis 1) (Genesis 1)
आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।
पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर की आत्मा जल के ऊपर मण्डलाती थी।
तब परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो”: तो उजियाला हो गया।
और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया।
और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहला दिन हो गया।
फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर अधिकार रखें।”
तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, परमेश्वर ही के स्वरूप के अनुसार उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।
तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।
Assembly of God Church Patliputra · Holy Bible Hindi Edition